पशुपालन और डेयरी

गाय की एक ऐसी नस्ल जो 50 लीटर प्रतिदिन तक देती है दूध, व्यापारी कमा रहे अच्छा मुनाफा

indigenous Indian gir cow
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ये गाय अर्ध शुष्क जलवायु में आसानी से पाली जा सकती है. इस गाय की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी अच्छी होती है, इससे यह बहुत कम बीमार पड़ती है. इससे पशुपालकों का ये एक बड़ा खर्चा बच जाता है. इस गाय का दूध, घी और गोमूत्र महंगे दामों पर बिकता है.डीडी किसान की एक रिपोर्ट के अनुसार, गिर गाय एक दिन में 50 लीटर तक दूध दे सकती है. हालांकि, कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गिर गाय सिर्फ 20 लीटर तक ही दूध देती है. वैसे गाय के पालन और नस्ल पर भी दूध की क्षमता निर्भर करती है.

सौराष्‍ट्र के गीर जंगल के नाम से गीर गाय का नाम पड़ा है, इनकी कीमत 90 हजार रुपये से साढ़े तीन लाख रुपये तक है। दूध का भाव गाय को खिलाये जाने वाले चारे व उसकी पौष्टिकता पर निर्भर करता है। गिर गाय को सूर्ती, देकन और काठियावाड़ी आदि नामों से भी जाना जाता है। यह गुजरात के अलावा महाराप्ट्र और राजस्थान में भी पाई जाती है। इस गाय का रंग काला या लाल होता है। तीन सौ दिन में यह औसतन 2500 से 4000 किग्रा से अधिक दूध देती है।

इस गाय की मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी खूब है. ब्राजील में इस गाय को बहुतायत में पाला जाता है. विदेश में ब्राजील ऐसा देश है जहां भारत की इस गाय का पालन होता है और दूध से अच्छा मुनाफा कमाया जाता है. गिर गाय की दो नस्लें काफी लोकप्रिय है, जिसमें स्वर्ण कपिला, देवमणी शामिल है.

गिर गाय मूल रूप ले गुजरात की भले हो लेकिन उसे राजस्थान के अजमेर और हरियाणा के भी कुछ इलाकों में पाला जाता है. अब धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है, लोग इसके बारे में जान रहे हैं और इसके पालन पर जोर दिया जा रहा है. इसका जीवनकाल 12 से 15 साल तक होता है. एक गाय अपने जीवनकाल में 6 से 12 बच्चे पैदा कर सकती है.

अच्छे प्रबंधन का परिणाम अच्छे बछड़े में होगा और दूध की मात्रा भी अधिक मिलती है। गाभिन गाय को 1 किलो अधिक फीड दें, क्योंकि वे शारीरिक रूप से भी बढ़ती है. सुबह 5 से 7 बजे – सुबह में 5 बजे से 7 बजे के बिच का समय गाय का दूध दुहना सही रहता है . इस समय में गाय अच्छे गुणवत्ता में दूध देती है . शाम 4 से 6 बजे – सुबह के बाद शाम के समय में गाय का दूध निकलने से ज्यादा दूध की प्राप्ति होती है. गिर गाय से बेहतर दूध उत्पादन के लिए संतुलित आहार देना चाहिए और गाय का बाड़ा आरामदायक बनाएं. साथ ही बेहतर स्वास्थ्य के लिए पशु चिकित्सकों से सलाह लेते रहें.

आइये जाने देसी गाय कितने प्रकार की होती है

साहिवाल गाय (Sahiwal Cow)

लाल सिंधी गाय (Red Sindhi Cow)

गिर गाय (GIR Cow)

थारपरकर गाय (Tharparkar Cow)

राठी प्रजाति (Rathi Prajati)

कांकरेज प्रजाति (Conchrage Prajati)

मेवाती प्रजाति (Mewati Prajati)

हरियाणवी गाय (Haryanvi Prajati)

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