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अनार की खेती बदल सकती है किसानों की तकदीर, हो सकती है करोड़ों में कमाई… जानें कैसे?

Anar
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राजस्थान में बीकानेर के किसान अनार की खेती में अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं। यहां किसान पहले मूंगफली, बाजरा और ग्वार की खेती करते थे, लेकिन अब किसान इन फसलों को छोड़कर अनार की खेती की तरफ बढ़ रहा है। बीकानेर में 2 लाख से अधिक अनार के पेड़ लगे हुए हैं।

किस तरह करें अनार की खेती

कृषि विभाग की तरफ से 30-40 रुपए का एक पौधा मिलता है। इस पौधे की 3 साल तक काफी देखभाल करनी पड़ती है। अनार के पौधों को फरवरी-मार्च या फिर अगस्त में लगा सकते हैं। अनार की खेती के लिए ये समय सही माना जाता है। अनार की खेती सभी तरह की मिट्टी में की जा सकती है।

अनार के पौधों की रोपाई

किसान अगर अनार की खेती करना चाहते हैं तो पौधा रोपण से करीब 1 महीना पहले गड्ढे खोद कर तैयार कर लें। ध्यान रखे कि खोदे गए गड्ढे करीब 60 CM लंबे, 60 सेमी चौड़े और 60 सेमी. गहरे होने चाहिए। इनकी दूरी लगभग 4 से 5 मीटर की होनी चाहिए। अब गड्ढों को 15 दिनों तक खुला छोड़ दें। इसके बाद लगभग 20 किग्रा. गोबर की खाद, 1 किग्रा. सिंगल सुपर फॉस्फ़ेट, 0.50 ग्राम क्लोरो पायरीफास का मिश्रण तैयार कर सभी गड्‌ढों की सतह से 15 सेमी. ऊंचाई तक भर दें।

अनार के पौधों की सिंचाई

अनार की फसल के लिए सिंचाई करना ज़रूरी माना जाता है। अगर अनार की खेती गर्मियों में कर रहे हैं तो करीब 5 से 7 दिनों बाद सिंचाई कर देनी चाहिए। सर्दियों का मौसम है तो 10 से 12 दिनों में सिंचाई कर देनी चाहिए। ध्यान रहे कि अनार के पौधों के लिए ड्रिप सिंचाई अच्छी मानी जाती है।

अनार की तुड़ाई

अनार के पेड़ से पूरे तरीके से पके फल ही तोड़ें। बता दें कि करीब 120 से 130 दिनों बाद फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाता है।

बतादें कि 3 साल बाद अनार का पेड़ फल देने लगता है। एक पौधा लगभग 20 से 25 सालों तक फल देता है। भारत में अनार की खेती अधिकतर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में होती है।

 

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